RELIGION

नवरात्रि में सिद्ध शक्तिपीठ सकराय में उमड़ पड़ते हैं भक्त

राजस्थान शक्ति व भक्ति की साधना स्थली रहा है। यही कारण है कि मातृ शक्ति के पुजारी यहाँ के शैलखण्डों पर असुरनासिनी माँ दुर्गा व भगवती के मन्दिर शंख नगाड़ों से गुंजायमान करते हैं। राजस्थान में देवियों के नामों का आधार प्राय: अवतार है, लेकिन ख्याति प्राप्त सिद्ध शक्ति पीठ व स्थानीयता भी नामकरण का आधार रहा है। राजस्थान के ...

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अनूठी थी भगवान शंकर की बारात, भूत-प्रेत-पिशाच थे बाराती

भगवान शिव की बारात के बारे में माना जाता है कि इसमें भूत-प्रेत नाचते हुए पार्वतीजी के घर तक पहुंचे थे और बारातियों ने सजने धजने की बजाय खुद पर भस्म को रमाया हुआ था। आइए जानते हैं शिव विवाह और उनकी बारात से जुड़ा किस्सा। माना जाता है कि पवित्र सप्तऋषियों द्वारा विवाह की तिथि निश्चित कर दिये जाने ...

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होली पर शनिदोष दूर करने के लिए करें ये उपाय

हनुमानजी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि वह सारे ग्रह दोषों का निवारण कर देते हैं। होली के मौके पर कई की पूजा-पाठ की जाती हैं जिसमें कुंडली दोष की पूजा कराना भी काफी शुभ माना गया है। यदि शनि दोष से पीड़ित हैं, तो होली के दिन एक काला कपड़ा लें और इसमें थोड़ी काली उड़द की दाल ...

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महाशिवरात्रि व्रत कथा

समस्त शास्त्रों के मतानुसार शिवरात्रि व्रत सबसे उत्तम है। शास्त्रों में इस व्रत को ‘व्रतराज’ कहा जाता है जो चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। आप में क्षमता हो तो अपने पूरे जीवन काल तक इस व्रत को करें अन्यथा 14 वर्ष के उपरांत संपूर्ण विधि-विधान से इसका उद्यापन कर दें। जगत की भलाई के लिए मां पार्वती ने भगवान ...

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पूजा घर किस दिशा में हो

पूजा स्थान घर में कहां होना चाहिए वास्तु के अनुसार पूजा स्थान ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। इस दिशा में पूजा घर होने से घर में तथा उसमे रहने वाले लोगो पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हमेशा बना रहता है। वस्तुतः देवी देवताओ की कृपा के लिए घर में पूजा स्थान वास्तु दोष से पूर्णतः मुक्त होना ...

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शनि की साढ़ेसाती को करना है दूर, तो अपनाएं ये उपाय

किसी व्यक्ति की कुंडली में चार, आठ या बारहवें भाव में शनि है तो उस व्यक्ति को शनि की कृपा प्राप्त होती है। शनि नीच राशि में या अस्त या वक्री हो तो व्यक्ति को दुख और कष्ट ही देता है। शनि मकर व कुंभ ग्रह का स्वामी है। अगर आपकी कुंडली में वास्तु दोष या फिर साढे सती या ...

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तप और दान का महत्व

भगवद गीता तप और दान को भी सत्व, राजस और तामस इन तीन गुणों के अनुरूप, तीन प्रकार में श्रेणीबद्ध करती है। गुरु, देवता, बड़ों और साधु-संतों के प्रति भक्तिभाव, स्वच्छता, स्पष्टवादिता, ब्रह्मचर्य और अहिंसाय ये सारे शरीर के तप के तरीके होते हैं। मीठा व्यवहार, सत्यवादिता, वेदों, उपनिषदों आदि के अभ्यास और ईश्वर का नाम जपते रहना, ये सारे ...

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सनातन धर्म तथा ब्रह्माण्ड में क्या है 108 का महत्व

सनातन धर्म के किसी भी शुभ कार्य, पूजा अथवा अध्यात्मिक व्यक्ति के नाम के पूर्व श्रीश्री 108 लगाए जाने की परंपरा है। लेकिन, क्या सच में आप जानते हैं कि सनातन धर्म तथा ब्रह्माण्ड में 108 अंक का क्या महत्व है? दरअसल, वेदान्त में मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख मिलता है। इसका आविष्कार हजारों वर्ष पूर्व ऋषि-मुनियों (वैज्ञानिकों) ने ...

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माँ सरस्वती के पूजन और ऋतु परिवर्तन का पर्व बसन्त पंचमी

बसन्त पंचमी एक प्रसिद्ध भारतीय त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा सम्पूर्ण भारत में बड़े उल्लास के साथ की जाती है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं। बसन्त पंचमी के पर्व से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। शांत, ठंडी, मंद वायु, कटु शीत का स्थान ले लेती ...

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भगवान भोलेनाथ दो तरह से तांडव नृत्य करते हैं

पुराणों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मनाद से जब शिव प्रकट हुए तो उनके साथ सत, रज और तम ये तीनों गुण भी जन्मे थे। यही तीनों गुण शिव के तीन शूल यानी त्रिशूल कहलाए। संगीत प्रकृति के हर कण में मौजूद है। भगवान शिव को संगीत का जनक माना जाता है। शिवमहापुराण के अनुसार शिव के पहले संगीत ...

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